दीनदयाल पोर्ट की यात्रा वर्ष 1931 में महाराव खेंगरजी द्वारा आरसीसी जेट्टी के निर्माण के साथ प्रारंभ हुई।
भारत की स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1947 में इस पोर्ट की सफलता की गाथा निरंतर आगे बढ़ती रही और
वर्ष 2007–08 में यह भारत का नंबर 1 पोर्ट बना,
तथा लगातार 14 वर्षों तक इस स्थान को बनाए रखा।
31 मार्च 2016 को दीनदयाल पोर्ट ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि
प्राप्त की, जब एक ही वर्ष में
100 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो का संचालन किया गया।
इस उपलब्धि के साथ यह भारत का पहला प्रमुख पोर्ट बना जिसने यह मील का पत्थर हासिल किया।
पूर्व में कांडला पोर्ट के नाम से प्रसिद्ध दीनदयाल पोर्ट, गुजरात राज्य के कच्छ जिले में,
गांधीधाम के समीप, कच्छ की खाड़ी पर स्थित है।
1950 के दशक में निर्मित यह पोर्ट, स्वतंत्रता के पश्चात पश्चिमी भारत का प्रमुख समुद्री बंदरगाह
के रूप में विकसित किया गया।
रणनीतिक रूप से यह पोर्ट पाकिस्तान के कराची पोर्ट से लगभग
256 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में तथा
मुंबई पोर्ट से लगभग
430 समुद्री मील उत्तर-उत्तर-पश्चिम में स्थित है।
आज दीनदयाल पोर्ट
कार्गो संचालन की मात्रा के आधार पर भारत का सबसे बड़ा पोर्ट
है। हाल के वर्षों में भारत के सबसे व्यस्त प्रमुख पोर्ट के रूप में,
दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से अपनी क्षमता में निरंतर वृद्धि कर रहा है।